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Yun Kadi Dhup Me Thandi Hawa Nahi Hoti

मेरे अल्फाज़

यूँ कड़ी धूप में ठंडी हवा नहीं होती

Saroj Yadav

273 कविताएं

282 Views
यूँ कड़ी धूप में ठंडी हवा नही होती
मै सोचती हूँ ये तेरी यादों का घना साया है
मेरी रंगत की तारीफ कब हुई थी भला
मेरे चेहरे पे तेरे प्रेम की बस छाया है
लोग हैरान है मुझे देख कर ये कहते है
कुछ तो है बात जो ये नूर उभर आया है
अजनबी शहर भी अज़ीज़ सा लगे है मुझे
सुन लिया जबसे कि इस शहर में तू आया है
मैं तेरा नाम भी जिस बज्म में सुन लेती हूं
दिल बहाने से फिर कई बार वहाँ आया है
यूँ कोई चाह कभी दिल की नही थी हमसे
पर तेरा नाम सुना और ये धड़क आया है
मुझसे आने के लिए मिन्नतें दिल करता रहा
पहलू में छुप तेरी महफ़िल में चला आया है

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