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Vedana Tere Nam Se Hi Man Bhig Jata Hai

मेरे अल्फाज़

वेदना तेरे नाम से ही मन भीग जाता है

Saroj Yadav

285 कविताएं

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वेदना तेरे नाम से ही मन भीग जाता है
वेदना क्या तुझे उपजाने वाले आत्माविहीन है
वेदना शब्द मात्र से सिहरन सी होती है
वेदना क्या कुछ के लिए तू अस्तित्वहीन है
अजब सी पीड़ा है व्यक्त भी नही होती
अजब सा दर्द है बस आंख ही नही रोती
वेदना हृदय की टीस है मुझसे अलग नही होती
वेदना, क्या भेड़ियों के लिए जंगल सी ये जमीन है
न जाने सदियों से अस्तित्व क्यों बचाया है
न जाने जाति पर कैसी ये प्रेत छाया है
वेदना अंत क्या तेरा अभागी होगा कभी
वेदना अब तो बता क्या ये यात्रा अन्तहीन है

- सरोज यादव""सरु""

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