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Tere Hi Sath Gujarate Hain Mere Shamo sahar

मेरे अल्फाज़

तेरे ही साथ गुजरते हैं मेरे शामो सहर...

Saroj Yadav

285 कविताएं

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तेरे ही साथ गुजरते हैं मेरे शामो सहर
तुझे तलाशती रहती है ये मासूम नजर

तेरे वादों को लिए फिरते हैं गीता की तरह
मेरी सांसो में घुला तूँ किसी खुसबू की तरह
तूँ नही तो मुझे महफ़िल में भी लगता है डर
तुझे तलाशती रहती है ये मासूम नजर

तुम चले आओ तेरी याद मुझे तड़पाये
रंग दुनिया का हसीं होगा मुझे न भाये
मेरे महबूब नही होता है अब मुझसे सबर
तुझे तलाशती रहती है ये मासूम नजर

तुम चले आओ तो गुलशन मेरा महक जाए
तेरे आने से मन का पंछी भी चहक जाये
बिन तेरे ये भी हर बात से जाता है डर
तुझे तलाशती रहती है ये मासूम नजर

तुझको डर है कहीं देख के न जाऊं बहक
मैं निबाहूँगी हरेक वादा मेरे जीने तलक
मेरी चाहत मेरी पूजा है तू मुझसे न डर
तुझे तलाशती रहती है ये मासूम नजर

तेरे ही साथ गुजरते हैं मेरे शामो सहर
तुझे तलाशती रहती है ये मासूम नजर.

सरोज यादव""सरु""

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