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Swatantra Hun Mai Apane Rache Sansar Me Rahne Ko

मेरे अल्फाज़

स्वतंत्र हूँ मैं हमेशा अपने रचे संसार मे रहने को

Saroj Yadav

285 कविताएं

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स्वतंत्र हो हमेशा तुम मेरी परवाह न करने को
स्वतंत्र हूँ मैं हमेशा अपने रचे संसार मे रहने को
स्वतंत्र हैं आंखे जब जी चाहे बरस जाने को
स्वतंत्र हूँ मैं हमेशा हर हाल में बस स्नेह जताने को
दोष होता ही नही किसी और का कभी किसी बात पर
स्वतन्त्र है हर कोई अपने लिए आंसू या मुस्कान चुनने को.
स्वतंत्र है तूँ मेरी सादगी का भी उपहास करने को
स्वतंत्र है तूँ हरेक लम्हा मुझे नजर अंदाज करने को
मुझे कोई शिकायत वैसे भी कभी रही कहाँ तुमसे
अगर चाहा तो बस यही कि प्यार के दो बोल सुनु तुमसे
फिर भी स्वतंत्र हो हमेशा मेरी बात सिरे से अनसुना करने को
और स्वतंत्र हूँ मैं हमेशा अपने रचे संसार मे रहने को

- सरोज""सरु""

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