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Sukun Chahta Dil Usako Bhi Aram Mile

मेरे अल्फाज़

सुकून चाहता दिल उसको भी आराम मिले

Saroj Yadav

277 कविताएं

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सुकून चाहता दिल उसको भी आराम मिले
ये थक चुका है खुद से ही गुफ्तगू करके

तुम इसका हाल भी पूछो जरा फुरसत से कभी
ये जी रहा है मगर जी रहा है घुट घुट के

तुम इसकी बात सुनो जैसी भी है अच्छी या बुरी
तुम्हें सुनाने को किस्से रखें हैं चुन चुन के

खुशी से इसको भी वक्त देके देखो जरा
हरेक लम्हा संवारेगी फिर ये चाहत के

गुजर रही है जो उसमे जरा कमी सी है
हो साथ तो क्यों आखों में रंग शबनम के

मुझे नहीं है ख्वाहिश कोई तुम्हारे सिवा
हटा दो सारे ये तोहफे दिए जो गहनों के

तुम्हारी आंख में बस प्यार का सैलाब दिखे
मैं डूब जाऊं बिन उम्मीद किये साहिल के

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