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Mujhe Tum Ajamana Chahte Ho

मेरे अल्फाज़

मुझे तुम आजमाना चाहते हो

Saroj Yadav

285 कविताएं

219 Views
मुझे तुम आजमाना चाहते हो
मेरे दिल को सताना चाहते हो
ये मुमकिन होगा क्या सोचो जरा
ये खाली घर गिराना चाहते हो

तुम्हें मालूम है दिल का ठिकाना
है तेरे घर मे अब इसका ठिकाना
यहाँ बस नाम की तख्ती लगी है
इसे भी तुम मिटाना चाहते हो

न जाने करते हो क्यों काम ऐसा
जरा सोचो है क्या अंजाम इसका
है आंखों में मेरी जिससे उजाला
वही दीपक बुझाना चाहते हो

नही कुछ चाहिए हमदम रहो बस
मिले न कुछ हो एक उम्मीद ही बस
इसी से कश्तीे को हम खींच लेंगे
क्यों तुम तिनका हटाना चाहते हो

तुम्हे हमसे शिकायत जो भी होगी
जरा गलती तुम्हारी भी तो होगी
मुकरते हो मगर यह गलत तो है
सजा मुझको दिलाना चाहते हो

तेरा इल्जाम सब हम ले तो लेंगे
मुहब्बत पर नहीं हम कम करेंगे
यही एक मिल्कियत तो है हमारी
क्यों इसको छीन लेना चाहते हो

मुझे तुम आजमाना चाहते हो
मेरे दिल को सताना चाहते हो
ये मुमकिन होगा क्या सोचो जरा
ये खाली घर गिराना चाहते हो

- सरोज""सरु""

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