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Jindagi Kab Kaha Tujhse Koi Shikayat Hai

मेरे अल्फाज़

जिंदगी कब कहा तुझसे कोई शिकायत है

Saroj Yadav

217 कविताएं

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जिंदगी कब कहां तुझसे कोई शिकायत है
तू अपनी जेब में खुशियां संभाल के रखना
मैं सारे काम अभी कर भी कहाँ पाया हूँ
मैं खाली जब रहूँ तोहफा मुझे तूँ तब देना
बड़ी हसीन है दुनिया ये लोग कहते हैं
कभी फुरसत से मुझे भी इसे दिखा देना
सुना है गम का वहां पर नही ठिकाना है
वो कौन लोग हैं मुझको जरा दिखा देना
मैं चाहता हूं कि फुरसत में वहां बस जाऊं
भले छोटा सही एक आशियाँ बना देना
बड़े सुकून से जीने का ख्वाब देखूं मैं
कभी हमारे लिए तूँ भी जरा दुआ करना
चलूँ मुझे अभी जीने को काम करना है
कभी कभी वहीं आके तूँ मुस्करा देना
मेरी आँखों के तो सपने भी खुरदुरे से हैं
तू आके उनको भी थोड़ा सही सजा देना
मैं पंख खोल के थोड़ी उड़ान भी भर लूं
मेरे लिए भी तू छोटा सा आशमां रखना

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