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Diya Bhi Jalta Rahe Khwab Bhi Na Dhundhala Ho

मेरे अल्फाज़

दिया भी जलता रहे ख्वाब भी न धुंधला हो

Saroj Yadav

188 कविताएं

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दिया भी जलता रहे ख्वाब भी न धुंधला हो
हवा हो जैसी भी कुछ देर ही तो रहना है
वीरान करके भी झोंका जो कोई गुजरा हो
वो उसका काम था अब काम हमे करना है
तुम हो मायूस तो दुनिया न तुम्हें पूछेगी
दुनिया तो उसकी है बिंदास जिसे रहना है
ख्वाब जो देखा है पूरा तुम्हीं को करना है
बाकी का काम तो सपनो में खलल करना है
राह पत्थर की है ठोकर भी लगा करती है
तुमको बचते हुए चलने का हुनर रखना है

- सरोज यादव

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