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Ab Hawayen Bhi Kya Khushabu Udhar Leti Hain

मेरे अल्फाज़

अब हवाएं भी क्या खुशबू उधार लेती हैं

Saroj Yadav

221 कविताएं

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अब हवाएं भी क्या खुशबू उधार लेती है
जिधर से गुजरती हैं ये उनके साथ होती है

घरों में देख लो दुनिया समा गई अब तो
और दुनिया में अब घर की बात होती है

कल जो बातें हुआ करती स्नेह में सनती
आज पल में उन्हीं बातों की कहानी बनती

प्यार व्यापार बना जाता है विकसित होकर
इश्क़ का भूत उतर जाता है कपड़ा बनकर

दिल से ज्यादा अब दुनिया की बात होती है
जाके दुनिया में मुहब्बत की बात होती है

अब भला पहले सी मासूमियत रही किसमे
अब तो बाजार चला आया प्यार के घर में

दिल से पहले ही दिलाने की बात होने लगी
और फिर उससे जमाने की बात होने लगी

दिल जमाना हुआ बाजार ने कीमत बदली
देख के जेब मुहब्बत ने भी सूरत बदली

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