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मेरे अल्फाज़

मेरा भारत

Sarla Singh

200 कविताएं

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मेरा भारत
अनको वेषभूषा अनेकों भाषा
अनेक संस्कृती अलग अलग
धर्म फिर भी एकता मे बंधा
मेरा भारत

एेसा कोई देश नहीं जहां विभिन्नताओं
में एकता हो जहां खुशियां मनाने के
लिए इन्तजार नहीं करना पडता यहाँ
हर दिन हर महीने एक नया त्योहार
है हमारी आजादी का दिन महज दिन
नहीं वो भी हमारे लिए एक त्योहार है
जिसे हम सब मिलकर हर्ष और उल्लास
से मनाते हैं ऐसा है
मेरा भारत

दीवाली पर सब मिलकर खुशियो के
दीप जलाते है ईद पर मिलकर गले
सब मोहब्बत बांटते है होली के रंगो
में सब घुल मिल जाते हैं बैसाखी पर
खूब धूम धडाका भगडा पाते है
गंगा के तट पर सुबह शाम आरती की
आवाजों से एक मधुर वातावरण होता है
एक सूकुन सा मिलता है मन को जब
सुबहा कानों में अजान का रस घुलता है
आपस में भले ही लडते झगडते हो मगर
जब बात देश की आती है सब एक लाइन
में खडे नजर आते हैं ऐसा है
मेरा भारत !

#AzadAlfaz

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