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मेरे अल्फाज़

मीरा दीवानी

Sarla Singh

59 कविताएं

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मीरा दीवानी गिरधर की दीवानी
जंग से बेगानी बस प्रेम दीवानी

त्याग दिये सब हार सिगार उसे ना
भाये महलो के ठाठ गोरे गोरे तन पे
पहने कोरी कोरी सारी महलो की रानी

राणा लगाये तन पर पहरा मन मे है
बैठा मुरली वाला दुनियां कसी करे नादानी

रोम रोम मे श्याम समाया प्यार का कैसा
जोग लगया सावरे के रंग रगी मीरा ने अपनी जिन्दगानी

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