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मेरे अल्फाज़

कवि कहता है- अगर मैं मनुष्य ना होकर कोई ...

Sarla Singh

465 कविताएं

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कवि कहता हैं कि अगर मैं मनुष्य ना होकर
कोई हिरण होता तो बिर्ज के वनों में भटक
रहा होता कुदरत के हर रंग रूप को करीब
से देख रहा होता ठन्डी ठन्डी हवाओं के झोंके
से अपना बदन सहलवा रहा होता नदी किनारे
खडे़ होकर पानी पी रहा होता नदी के बहते
हुए पानी से अपनी प्यास बुझा रहा होता
और जब थक जाता तो वही वनो में अपने
चारो पैरों को फैलाकर आराम से सो रहा होता
कवि कहता है अगर मैं मनुष्य ना होकर कोई
पंछी होता तो बिर्ज के जंगलों में कदंबो की
पेड़ की टहनियों पर बैठकर चहक रहा होता
कदंबों के पेड़ों के बाग में राधा कृष्ण की प्रेम
लीला देख रहा होता हरि प्रभु के चरणों को छु
कर वहीं प्रभु के प्रिय कदंबों के पेड़ पर बैठकर
अपना जीवन व्यतीत कर रहा होता

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