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मेरे अल्फाज़

आ कि तेरा इन्तजार करती हूँ

Sarla Singh

560 कविताएं

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आ कि तेरा इन्तजार करती हूँ
करवटे रात भर मैं यार बदलती हूँ
नींद जो कुछ पल आती है
उस में भी ख्बाब तेरे देखती हूँ
आ की तेरा इन्तजार करती हूँ

देख सोलह सिंगार करती हूँ
तेरे लिए मै बिंदियां चूड़ी कंगन झुमके
पाजेव पैैैरोंं में पहनती हूँ
देख तेरे लिए मै कितना संजती संवरती हूँ
आ की तेरा इन्तेजार करती हूँ

बार बार आईना देखती हूँ
बने हुए बालों को फिर संवारती हूँ
असा तेरे आने से पहले मैं रोज करती हूँ
आ की तेरा इन्तेजार करती हूँ

मोहब्बत मे मैं हूँ
बस मोहब्बत ही मैं करती हूँ
इन दिनो सब से बेखबर हूँ
क्युंकी इन दिनों मैं इश्क में हूँ
बस तुम्हारा ही नाम याद रखती हूँ
बस मै तुम्हारी ही हूँ
आ की तेरा इन्तजार करती हूँ !


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