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मेरे अल्फाज़

एक याद

Sapna Jain

3 कविताएं

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चाँद की बाँहों में जब चाँदनी मुस्कुराती है,
हल्की-सी एक याद हमें तेरी भी आती है।
छूटता है उनका साथ बस अमावस की रात में,
पर हमारी हर रात अमावस बताई जाती है।

सँवर जाती है ज़िन्दगी तेरे एक ख्याल से,
पर डर लगता है ज़माने के एक सवाल से,
के क्यों नहीं तोड़ते तेरी यादों का आईना,
पर टूटता कहाँ है नाता अपने ही हयात से।

नहीं इश्क़ मुकम्मल मेरा जो तू मुझे मिला नहीं,
समझती है ये दुनिया और इसका मुझे गिला नहीं,
बर्दाश्त हैं अभी और भी रुसवाईयाँ,
दिल में दर्द तो है पर अभी छिला नहीं।

रुक जा ऐ दिल ज़रा, इतना क्यों रफ़्तार में है,
साँस ले इत्मीनान से, इतना क्यों इज़्तिरारमें है,
तू ही नहीं बेताब उसकी एक झलक को
ज़न्नत में ही सही, वो भी तेरे इंतज़ार में है।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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