ये दुनिया सेमल फूल है

                
                                                             
                            ये दुनिया सेमल फूल है ,मत रंग देख ललचा।
                                                                     
                            
ये फल खाकर पछताएगा,इस मन को ले समझा।

गुरु बिन मुक्ति नहीं जगत में ,नहीं गुरु बिना ज्ञान।
ज्ञान बिना इंनसान का जीवन, होता है पशु समान।

सद्गुरु धोबी ऐसा है जो धो देता सांगों-पांग।
ज्ञान का साबुन रगड़ के सब हर लेता अज्ञान।

(हर--सबमे, हर--ईश्वर)

लेखक--संजीव शर्मा (हिंदी अध्यापक)
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खटौली (पंचकूला) हरियाणा।

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1 month ago
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