हम हिन्दी हैं

                
                                                             
                            हम हो चुके आजाद लेकिन
                                                                     
                            
आत्मा गुलाम क्यूं?
जा चुके अंग्रेज, अब भी
अंग्रेजी ही अरमान क्यूं?
क्या हिंदी में कोई खोट है?
तो मिथ्या ये भ्रम है क्यूं?
मां भारती की आरती
उतारने में शर्म हैं क्यूं?
भाषा कोई बुरी नहीं।
ज्यादा से ज्यादा सीखिए।
अपनी मातृभाषा को मगर
स्थान पहला दीजिए।
अन्तर्राष्ट्रीय कहके सदा
ना अपना पल्लू झाड़िए।
हिम्मत कर सारी दुनिया में हिंदी के झण्डे गाड़िए।
स्वयं भी हिंदी बोलिए
औरों को भी सिखाइये।
आनन्द का सागर है ये
आनन्द बेहद पाइये।
जैसे केवल मां की गोद में
निश्चिंत हो बालक सोता।
वैसे ही मां बोली का भी
विकल्प नहीं कोई होता।
संस्कृत की बेटी है हिन्दी
पूर्ण वैज्ञानिक भाषा ।
गर्व करे हर भारतीय इस पर
संजीव की ये अभिलाषा ।

लेखक- संजीव शर्मा
हिंदी अध्यापक
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खटौली।
खण्ड बरवाला ,(पंचकूला)

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8 months ago
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