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मेरे अल्फाज़

फागुन का मौसम

Sanjay Rajoria

30 कविताएं

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फागुन का मौसम आया है,रंगों की बौछार लिए,
बच्चों की किलकारी लेकर,होली का त्यौहार लिए।
धरती दुल्हन बनी हुई है,ओढ़ चुनरिया सतरंगी,
सराबोर रंगों में अपने सारे साथी और संगी।
सात सुरों की सरग़म लेकर,भँवरों का गुंजार लिए,
फागुन का मौसम आया है,रंगों की बौछार लिए ।
फूलों की क्यारी महकी है,कलियाँ घूंघट खोल रहीं,
दूर कहीं बागों में बैठी,काली कोयल बोल रही ।
महक रहीं गाँव की गलियां,हर पल नई बहार लिए,
फागुन का मौसम आया है,रंगों की बौछार लिए ।
विक्टर भीगा,सलमा भीगी,भीगी राधा रानी है,
रंग प्यार का चढ़ा हुआ है,सबकी यही कहानी है ।
बैर-भाव आपस के भुलाने,प्यार के रंग हजार लिए,
फागुन का मौसम आया है,रंगों की बौछार लिए ।
हम भी आओ खुद को रंग लें,इस होली के रंगों से,
अपने अंग-अंग को भर लें,जीवन की उमंगों से,
बज उट्ठेगी मन की वीणा,तारों में झनकार लिए,
फागुन का मौसम आया है,रंगों की बौछार लिए ।


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