आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Tanhai me kaun jalega

मेरे अल्फाज़

तन्हाई में कौन जलेगा

Sanjay Narayan

66 कविताएं

375 Views
विदा हुईं जो बैरन ख़ुशियां, शहनाई में मौन जलेगा।
तुम बिछड़े तो अश्रुधार की, पहुनाई में मौन जलेगा।।

सही सलामत हैं ख़ुशियां तो, जलने वाला खूब जलेगा।
यदि कलियों संग रंगरलियां तो, मन ही मन महबूब जलेगा।

फूल बिछे हों पथ में तुम बिन, सर्द भूमि पर पांव जलेगा।
हाथ अगर तुम थामो मेरा, मुझसे सारा गांव जलेगा।

तुम स्वीकृति दो इस आशा में, हृदय दीप सा जलता मेरा,
मैं न रहा तो तेरे हिय की अंगनाई में कौन जलेगा।।

सुधा प्रसारण लक्ष्य उसी का, जो विष पी पी बढ़ा पला है।
ना जाने क्यों जगत समूचा, प्रेमी हिय से कुढ़ा जला है।

भय दिखलाकर लोक लाज का, जीवन भर अभिसार जला है।
विरह- व्यथित हैं सावन -भादौं, मधुमासों में प्यार जला है।

झर चुकते जब सारे आंसू, नयन प्रतीक्षारत जलते हैं,
मत आना तुम वापस बरना, तन्हाई में कौन जलेगा।।

संजय नारायण


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!