आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Maa

मेरे अल्फाज़

माँ

Sanjay Narayan

66 कविताएं

13 Views
बेहतर तो कोई इंसान नहीं होगा।
कोई माँ से अधिक महान नहीं होगा।

देखा कभी नहीं उसको पर लगता है,
माँ से प्यारा तो भगवान नहीं होगा।

मेरे सिर पर माँ के आँचल का पल्लू,
दुनियाँ में मुझसा धनवान नहीं होगा।

ममता करुणा दया दुलार प्यार ये सब,
इक घर में इतना सामान नहीं होगा।

घर की रौनक, माँ की लोरी -मुस्कानें,
स्वर्ग भी इससे आलीशान नहीं होगा।

कर सकना तो माँ पर वक़्त लुटा देना,
इससे बढ़कर जप -तप -दान नहीं होगा।

संजय, वह दिल बदकिस्मत होगा जिसमें,
माँ की सेवा का अरमान नहीं होगा।

संजय नारायण


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!