देश भक्ति और खेल

                
                                                             
                            खेल भावना बदल चुकी है
                                                                     
                            
दो देशों की दुश्मनी मिल चुकी है
हार जीत मानो युद्ध से मिल चुकी है
जनता भी वैरी एक दूजे की बन चुकी है

लकीरों में दूरियां बन चुकी है
गोलियों बारूद से रक्तलीन हो चुकी है
इतिहास की बर्बादी बया हो चुकी है
खेल भावना बदल चुकी है
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे
7 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X