आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   ghazal : manch ke peechhe se

मेरे अल्फाज़

मंच के पीछे से

Sanjay Grover

64 कविताएं

692 Views
ग़ज़ल
पद सुरक्षा धन प्रतिष्ठा हर तरह गढ़ते रहे
और फिर बोले कि हम तो उम्र-भर लड़ते रहे

क़ागज़ों की कोठरी में क़ैद कर डाला वजूद
फिर किसी अखबार में तारीफ़े-ख़ुद पढ़ते रहे

मंच पर जिन रास्तों के थे मुख़ालिफ़ उम्र-भर
मंच के पीछे से वो ही सीढ़ियां चढ़ते रहे

नाम पर बदलाव के इतना इज़ाफ़ा कर दिया
रोज़ तस्वीरें बदलकर चौखटें जड़ते रहे

इन अंधेरों में भी होगी प्यार की नन्हीं-सी लौ
बस इसी उम्मीद में मेरे क़दम बढ़ते रहे
-संजय ग्रोवर



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!