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मेरे अल्फाज़

हिंदी

Sanjay Chaudhary

5 कविताएं

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कितनी लाचार है आजकल हिंदी
अपने ही घर मे परिहास है हिंदी
कभी दिया करते थे माँ का दर्जा
माँ के आँचल का वो अहसास है हिंदी
सब भूले है ऐसे इसको
जैसे कोई तिरस्कार है हिंदी
तरस आता उनपर मुझको
जिनसे आज शर्मसार है हिंदी
नवयौवना सी सुंदर सुसज्जित
देश के गौरव का इतिहास है हिंदी
तुम अपनाओ सबको प्रतिकार नहीं
पर विशेष पद की दावेदार हैं हिंदी

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