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Raat bhar

मेरे अल्फाज़

रात भर

Sanish kumar

2 कविताएं

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आपकी याद आती रही रात भर,
नम आँखों से गिरते रहे अश्क़ रात भर,
रात भर दर्द का एहसास होता रहा...
उस दर्द से दिल तड़पता रहा रात भर,
झिलमिलाती हुई रोशनी भी उस मोमबत्ती की,चुभती रही ,रात भर,
पिघलता रहा दिल तेरी यादों से रूबरू होकर उस मोम की तरह, रात भर,
कोई दीवाना मचलता रहा रात भर,
एक दर्द भरी आह आती रही रात भर,
कड़वी हुई चासनी भी इस दिल की जो कल तक मीठी थी,
और उस कड़वाहट में डूबे रहे हम, रात भर...!

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