आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Main kar sakti hoon

मेरे अल्फाज़

मैं कर सकती हूँ

Sangita Mahato

3 कविताएं

48 Views
नन्हें आँखो में हैं सपने बड़े,
लड़खड़ाते हैं कदम पर इरादों पे हैं डटे।
बंध पिंजरे से बाहर उड़ने दो न मुझे,
इस खुली हवा में जी भरकर सांस लेने दो न मुझे।
इरादे है आगे जाने की
मत रोको मुझे,
ख्वाइ शें हैं    मुझे।
इरादे है नेक,मैैैं  कर सकती हूँ,
उस अकाश पर अपना नाम,मैैैं
सुनहरे अक्षरों में लिख सकती हूँ।
रणभूमि में सबसे आगे रहकर, मैैैं
गर्ब से विजय पताका लहरा सकती हूं,
ज्ञान की राेेेशनी को नहला सकती हूं,
कमजोर मत समझ न मुझे,मैैैं
एवरेस्ट चढ़के तिरंगा लहरा सकती हूँ।
समंदर का शीना चीर कर गरजते हुए,मैैैं
अपनी जगह बखूबी बनाना जनती हूँ,
खोल दो मेरी बेड़िया, मैैैं
अपने हिसाब से दुनिया को चलाना जानती हूँ।
आने दो न मुझे इस दुनिया में,
मैैैं अपने दुमपे किस्मत लिख सकती हूँ,
मैैैं अपने देश का नाम रोशन कर सकती हूँ,
हां मैैैं कर सकती हूँ।

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!