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मेरे अल्फाज़

हिंदुस्तानी

Sangita Mahato

3 कविताएं

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चिंगारी नही सैलाब हैं हम
सब पाना चाहे ऐसे ख्वाब हैं हम
जो ठान ले बो करके दिखा दे
हिम्मत है ऐसी की पर्वत का सीना चीर दे
गंगा की तरह पावन,हिमालय की तरह दृढ़
और बुद्ध कि कोमलता धारण करने वाले है हम,
दो शो कोरोड़ की आबादी को भीड़ नही भाई कहने वाले हम।
गांधी के अहिंसा को मानने वाले हैं हम,
नेताजी के सत्साहस को हृदयंगम करने वाले हैं हम,
गीता ज्ञान का पालन और बिवेक बणियों को धारण करने वाले हैं हम

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