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मेरे अल्फाज़

मुफ़लिस की लाचारी देखी

sangita goel

6 कविताएं

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दिल पर हरदम भारी देखी
जीवन की जो लाचारी देखी
टूटा दिल और बिखरी साँसे
दिल पे जुल्मत जारी देखी
मिटा अंश माँ के गर्भ में
चली कन्या पर आरी देखी
व्यथित मन छलनी छलनी
नेह व्यथा से हारी देखी
अगर नही था दाना पानी
चीथड़ उसकी धानी देखी
भूख प्यास से व्याकुल
बच्चो की किलकारी देखी
आई दीवाली रोते बच्चे
कैसे दिल पर हारी देखी
माँग मांग कर लाया जो कुछ
सर नीचे बाँह पसारी देखी..
कट कट कटती जाती
अंत समय की तैयारी देखी
हाय, तड़प जो निकली साँसे
मुफलिस की लाचारी देखी
छोड़ चला जो विपदा अपनी
जीवन से छुटकारी देखी

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