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मेरे अल्फाज़

प्रकृति का बदला रुख

Sandhya Sharam

15 कविताएं

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प्रकृति भी शांत हो गई
अपने कदमों को रोक गई.....।।

ऐ प्रकृति तूने भी ,
कहा लाकर खड़ा कर दिया
पहले गले मिलकर,
प्यार जताना सिखाती है
आज दूर रहना सीखा रही हैं।।

तू भी वक़्त के साथ बदल गई
कड़वे घूंट पीला रही है,
अपनों से दूरियां बढ़ा रही है.....।।

यहां आदमी को ,
बदलते देखा था
आज तू भी अपना रंग,
बदल रही है
अपना गुण बदल रही हैं......।।

अपना कहर बरसा ये जा रही
नफरतों की आंधियां फैला रही हैं......।।

अब उमंगों के बादल छाजा
अब तू ही प्रेम ,
बरसा जा .......।।

है, प्रकृति अब तू ,
अपने क्रोध को शांत कर
अपनों की नजदीकियों को बढ़ा
*तेरा ममत्व का गुण दिखा दे.......।।*

तेरे क्रोध को शांत कर
अपने आंचल में हमको छिपा ले.......।।

प्रेम के गीत अब तू फैला दे
अपनों में मिठास तू घोल दे......।।

लोटा दे अब उन खुशियों को
इन पंछियों की चहचहाहट सुना दे
तेरी मनोहर छटा,
अब तू दिखा दे......।।

*संध्या शर्मा*


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