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मेरे अल्फाज़

चुनाव का दौर आया

Sandhya Chaturvedi

64 कविताएं

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अभिनेताओं का नेता बनने का दौर आया है।
मेरे गांव में फिर चुनाव आया है।

जनता को लुभाते सभी उम्मीदवार,
चुनाव मैदान बना आज एक व्यापार।

दिखाए जाते रोज करतब नये-नये
लुभाये जाते वोटर जो हैं नये - नये।

कभी अश्लीलता को भी परोसा जाता थाली में,
बार डांसर के ठुमके लगाये जाते वाड़ी मे।

कभी संगीत की धुन पर नाचे लजवंती है।
कभी खेतों में घास काटे बसंती है।

कभी शपथ मातु की खाते हैं।
नेताओं के ईमान बिक जाते हैं।

कोई बने गंगा की बेटी,तो कोई यमुना पुत्र कहता है
चुनाव जीतते ही बस दम्भ और लोभी बन जाता हैं।

अभिनेता करते शासन तो प्रशासन अभिनय क्षेत्र बन जाता है।
सासंद संसद में कम,वालीवुड में ज्यादा नजर आता है।

मेरे देश मे चुनाव का जब - जब महीना आता है।
सारा गांव एक रंगमंच बन जाता हैं।।

संध्या चतुर्वेदी
अहमदाबाद गुजरात
#मेरे_अल्फाज




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