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Tears are on the face of those dolls today #Kathuwa

मेरे अल्फाज़

आंसू आज उन गुड्डे-गुड़ियों के चेहरे पर भी हैं

Sandeep Panwar

4 कविताएं

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जहां गूंजी थी किलकारियां
आज वहां सन्नाटा है...
लेकिन उस सन्नाटे में छिपा एक शोर है
शोर.. तेरे दर्द का, शोर.. तेरे इंसाफ का

सोचता हूँ तेरे पर हुए सितम को
तो आंखे भर आती है...
लेकिन तूने तो सहा है वो दर्द
जिससे रूह कांप जाती है

आंसू आज उन गुड्डे-गुड़ियों के चेहरे पर भी हैं
जिन्होंने तुझे खूब हंसाया था..
चूर-चूर हो गए वो सुनहैरे सपने
जो माँ ने कोख में रहते हुए तेरे लिए संजोए थे

दुःख है आवाज़ भी तब उठी जब तू ना रही
ये कायरों की महफ़िल है
यहां गुलाम भी कायर है.. शहंशाह भी कायर है

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