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मेरे अल्फाज़

बेचैन दिल

Sandeep Gupta

9 कविताएं

364 Views
बस एक बार खोल दो,
अपने दिल की बेचैन खिड़कियों को।
बड़ी आरजू है मेरी यह देखने की,
मेरा वज़ूद उनमें है भी या नहीं
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