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मेरे अल्फाज़

मैं गुजारिश करता हूँ

Sandeep Arya

24 कविताएं

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मैं गुजारिश करता हूँ आज की शाम के साथ
देश में मिल के रहिये दोस्तों आराम एक साथ

क्या रखा है कौन कहां का रहने वाला है
सबको जीने दो उनके नाम के साथ

सब की अपने हिस्से की दुनिया है
कोई खुश कुरान, तो कोई राम के साथ

सौ बरस की जिंदगी काट लो कर्जे की है
जायेगा कुछ भी नहीं स्वर्ग में इंसान के साथ

सोच कर देखो भला क्या वक्त ये हिंसा का है
चैन से गुजरे समय आदमी का काम के साथ

तुम बहदुर हो, या कायर फर्क कुछ पड़ता नहीं
कौन चाहेगा भला, मरना किसी इल्जाम के साथ

बेरुखी कैसी है यारो, देश तो हम सबका है
जय हो भारत माँ की मेरे तिरंगे की शान के साथ

मैं गुजारिश करता हूँ आज की शाम के साथ
देश में मिल के रहिये दोस्तों आराम एक साथ


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