आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जब विद्यालय हम जाते थे

                
                                                                                 
                            जब विद्यालय हम जाते थे।
                                                                                                


पीठ पर भारी _सा झोला,
सीधी नीयत, मन भोला,
हंसते _गाते,बात बनाते,
अपने पर इतराते थे,
जब विद्यालय हम जाते थे ।

गुरुओं को करते थे प्रणाम,
आखों में डर, दिल में सम्मान,
उनके पढ़ाए पाठों को,
इक सुर में सब दोहराते थे,

जब विद्यालय हम जाते थे।

थी ,यारों की प्यारी टोली,
खाती खट्टी _मीठी गोली,
आपस में बन कर हमजोली,

सब साथ में घर को आते थे।

जब विद्यालय हम जाते थे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X