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गुमनाम!

                
                                                                                 
                            ज्यादा तजुर्बेगार न सही,
                                                                                                

नादान भी नहीं हैं।
आपकी इन अदाकारियों से, अंजान भी नहीं हैं।
न यूं रुसवा करें हमें, महफ़िल में,
ऐ मेरे हमदम!
हम पहचानी हस्ती न सही, लेकिन गुमनाम भी नहीं हैं ।।😇
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 months ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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