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मेरे अल्फाज़

बिखरे ख़्वाबों में चलिए मेरे

Salil Saroj

654 कविताएं

765 Views
दो कदम साथ चलिए मेरे
फिर हालात बदलिए मेरे

तन ही सारा छिल जाएगा
जो ज़ख्मों से गुजरिए मेरे

जान जाते दर्द की गहराई
साथ ही डूबिए,उभरिए मेरे

ज़िन्दगी कोई हादसा लगेगी
बिखरे ख़्वाबों में चलिए मेरे

सलिल सरोज


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