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मेरे अल्फाज़

अपना साया कर लीजिए हमें

Salil Saroj

689 कविताएं

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उन रास्तों में बहुत धूप होगी
अपना साया कर लीजिए हमें

दौलते-हुस्न बचाके ले आएँगे
बस रिआया* कर लीजिए हमें

अगर कहीं भी हैं, हम आप में
फिर नुमाया* कर लीजिए हमें

हम जी सके सहूलियत से,बस
उतना कमाया कर लीजिए हमें

आप चाँद हैं, यह मालूम है हमें
अपनी काया कर लीजिए हमें

रियाया*-अवाम; जनता; प्रजा
नुमाया*-व्यक्त,स्पष्ट


सलिल सरोज

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