ये पहली दफा तो नहीं था

कत्ल करके में रोया नहीं
                
                                                             
                            ये पहली दफा तो नहीं था,
                                                                     
                            
सो कत्ल करके मैं रोया नहीं।

वो यूं बेवफा ही कब हुआ था,
सो आंखें बंद की, पर सोया नहीं।

उसे पालना ही था दुश्मन अपना,
सो ज़ख्म खाया और धोया नहीं।

बंजर जमीन, गरीब बारिश देख,
किसान बीज खरीदा, पर बोया नहीं।

उसे सब फंसाना सा ही लगता है,
अभी सलामत है, अपनों को खोया नहीं।

- सलिल सरोज

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3 years ago

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