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मेरे अल्फाज़

दर्दो गम की तासीरें

Saikh Alam

45 कविताएं

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आज की सुबह बड़ी उदास है ,
दिल जां मे गहरी खटास है!

रूहानी प्यासी प्यासी बहने लगी,
और इबादत में नयी बकवास है,

नब्ज निचोड़ रही है किरणें उजाला कहीं का ,अखबार ला रहे हैं मुत्तला कहीं का,
खबरों में आब्रुरेजी लिपटी है,
मिन्नत ,वकार, अमन, दया बदहवास है!
आज की सुबह बड़ी उदास है......

गुल ,गुलनार के नाम खार है ,
इस समय कई लालची ज्वार है,
सहे रहे तो अमन दिख रहा है...
पर राख के नीचे कोई भड़ास है!
आज की सुबह बड़ी उदास है...

हर चेहरे पे दर्दो-गम की तासीर है,
बेजान, बेजुबा, बेहया यहां की जमीरे है,

सब दिल में कटुपन के जज्बात लिए है ,
होश के होठों पर कहां अब मिठास है !

आज की सुबह बड़ी उदास है,
दिल जां में गहरी खटास है........!

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