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मेरे अल्फाज़

राम जन्मभूमि

Sadhvi Vibha

4 कविताएं

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जन्मभूमि की सुनो पुकार
करना है जिसका उद्धार 
गूँज रहा है आज चतुर्दिक
हिन्दू -जन की ये हुंकार
हिन्दू-धर्म के योद्धा जागो
अवसर है सम्मान की
भोगी भागे,योगी आये मिला समय निर्माण की

बाबर के जो बने समर्थक
डूब गये हैं वो मजधार
फिर भी  यदि आते है सम्मुख
उनका करना है संहार 
अपना रक्त बहा अब बारी शत्रु के संहार की

अवधपुरी में राम रहेंगे
नही और कुछ बनना है
बाबर हो या अन्य लूटेरे
नहीं देश में रहना है

इनसे खाली करनी होगी 
धरती हिन्दुस्थान की

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