आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Niyat

मेरे अल्फाज़

नीयत

sachin panchal

1 कविता

207 Views
बदनामी तुम हमारी जितनी चाहोगे,
हम तुम्हें उतना बदनाम करेंगे ;
हमे हराने के लिए नियत साफ रखना,
वरना खुद को भूल,चर्चे हमारे याद रखोगे !
~Sach_in 


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!