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ग़ज़ल : मेरे नाम हो गई है

                
                                                                                 
                            तेरी रहमतों की बारिश..…सरेशाम हो गई है
                                                                                                

मेरी और तेरी कहानी......सरेआम हो गई है

इक मेरी ही नहीं ये.... सबकी नजर है तुझ पर
मेरी जाना जब से तू.... गुलफाम हो गई है

मुझे छोड़कर किसी के.... अब तुम ना हो सकोगे
दुनिया की तू नजर में .....मेरे नाम हो गई है

तेरे नाम से है मेरी..... पहचान अब यहां पर
ये पहचान मेरी खुद की..... गुमनाम हो गई है

जब से खड़े हैं नादां..... मोहब्बत की राहगुज़र में
तब से मोहब्बत अपनी.....ये बदनाम हो गई है

अब बचोगे भी तो कैसे..... ये दुनिया की नज़र से
मोहब्बत में तो यहां पर.... कत्लेआम हो गई है

करे कौन अब मोहब्बत... ये इक मौत का सफर है
ये इकरार-ए-मोहब्बत भी....इल्जाम हो गई है

भावार्थ
गुलफाम : बहुत सुंदर, प्रिय
- सचिन सागर
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1 month ago

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