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ग़ज़ल : फिसला है दिल ये मेरा

                
                                                                                 
                            फिसला दिल ये मेरा, हर हसीन पर
                                                                                                

दिल को लुटा दिया, हर महजबीन पर

अपने भी तो जाना , कुछ उसूल हैं
फेंका नहीं कंकड़, इक नाजनीन पर

थामा जो हाथ तुमने, इस गरीब का
आये खुशी मनाने , तारे जमीन पर

रुख पे तेरे पसीना, है इस तरह
जैसे कि हो शबनम, गुल-ए-जमीन पर

धड़के दिल मेरा, जोरों से जाने क्यों
आके जो बैठे तुम, मेरे करीन पर

करे ना मोहब्बत, जो अपने मुल्क से
लानत सबकी यारों, उस कमीन पर
- सचिन सागर
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1 month ago

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