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मेरे अल्फाज़

मौत से जीतकर भी हारा

Ruchi Sharma

14 कविताएं

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बहुत हिम्मत और विश्वास से,
जिंदगी की जंग जीती थी मैंने।
ठोकरें भी ना जाने कितनी, कदम-कदम पे खाई थी मैंने।
हर राह में मौत से सामना हुआ,
पर अपनी उम्मीद को मौत नहीं आने दी मैंने।
हौसलों के पंख हर रोज लगाए,
एक नये सफर पर उड़ने के लिये,
ना कभी रुका, ना कभी थका,
ना दिन रात में फर्क किया मैंने।
सब कुछ ख़त्म हो जाने के बाद,
फिर से सबकुछ पाने की चाह की थी मैंने।
मगर आज मेरी उम्मीद टूट गई,
संवरी हुई मेरी जिंदगी फिर से बिखर गई,
आज मेरी उम्मीद की इंतहा हो गई,
जिसके लिये वापस आया था,
मौत से भी लड़ आया था।
वो ही मुझसे दूर हो गई,
ऐसा किया क्या था मैंने?
एक रोजगार ही तो गया था, प्यार से पैसा बड़ा था,
शायद इसी बात की सज़ा पाई थी मैंने।

- रूचि शर्मा

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