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मेरे अल्फाज़

मैं उसके याद आ रहा हूँ

Rohit Singh

44 कविताएं

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मैं ने एक अरसे से देखा नहीं उसको,
ख्यालों में उसका चेहरा बना रहा हूँ।
आज मुझे हिचकी भी बहुत आ रही है,
लगता है मैं उसको याद आ रहा हूँ।

आज मैं ने फोन किया था उसे,
जो बात कहनी थी वही छुपा रहा हूँ।
रात मेरे सपने में तुम आई थी,
क्या मैं भी तुम्हारे सपनो में आ रहा हूँ?

लगता है ख़्वाहिश अब मेरी पूरी होगी,
अब मैं सिर्फ उसका होने जा रहा हूँ।
इंतजार खत्म होगा टिकट हो गया है।
तुमको मालूम नहीं मैं घर आ रहा हूँ।

कल उसने मिलने को कहा है,
सो आज ही से तैयार हो रहा हूँ।
उससे मिलने की खुशी मैं जल्दी आ गया,
अब बैठकर उसी का इंतज़ार कर रहा हूँ।

खत्म इंतजार हुआ कि वो आ गए हैं,
बात वो शुरू करें ये तरक़ीब लगा हूँ।
बातें जितनी करनी थीं सब भूल गया,
अब मैं सिर्फ बातें बना रहा हूँ।

उसके लिए मैं कुछ लाने चला गया,
देर हो गई है उसका फोन आ रहा है।
फोन उठाते आवाज आई कहां रह गए,
मैं बोला हेलो आ रहा हूँ आ रहा हूँ।

क्या कहना था क्या कह आया पछता रहा हूँ,
उसकी बातों को याद करके मुस्करा रहा हूँ।
मुझे अब फिर से हिचकी आई है,
मैं उसको फिर याद आ रहा हूँ।

✒रोहित सुलतानपुरी

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