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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Rohit Singh

45 कविताएं

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मेरे सीने में भी एक प्यारा दिल है मगर, न जाने क्यूँ हमको मोहब्बत से डर लगता है।
चलो एक दफा हम मोहब्बत कर भी लें मगर, हमको इजहार ए मुहब्बत से डर लगता है।

इश्क के राह पर चलने का सोचा तो था, पर हर सक्श के इरादे से डर लगता है।
कुछ दो चार दिन की बात हो तो कर भी हम लें उम्र भर के वादे से डर लगता है।।

तू डूबा दे या फिर मुझको किनारे पे कर, मेरी ज़िन्दगी अब तेरे हाथों में है।
मेरे माँझी तू मुझको साहिल पे ले चल तेज लहरों से मुझको यूं लगता है।।

अपनी ज़िन्दगी का सौदा हम किस से करे, हर कोई हमको क़ातिल नजर आता है।
ज़िन्दगी में हमारी इतने अंधेरे है, दिन के उजाले में भीअब हमको डर लगता है।।

आपको देखा तो मुझको ऐसा लगा, ज़िन्दगी जीने की एक वजह मिल गई।
ख़्वाहिश तेरी जुल्फ की छाँव में सोता रहूँ, अकेले सोने में अब डर लगता है।।

बिन तेरे यार गर मुझको जीना पड़ा, ऐसे ख़यालात से भी हमको डर लगता है।
बिन तेरे जीने का यार सोचा नहीं, तूही सच्चा मेरा हमसफर लगता है।।

बेकरारी सताती है तेरे बगैर, नींद आती नहीं चैन खो जाता है।
अब तू पागल कहे या मुझको दिवाना कहे, बीते तुझमें मेरा हर पहर लगता है।।

✒रोहित सुलतानपुरी


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