आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Do not tell alfaz how,

मेरे अल्फाज़

अल्फाज़ नहीं बोलूँ कैसे...

Rohit Singh

44 कविताएं

85 Views
अल्फाज नहीं बोलूँ कैसे
कितना किया तोलूँ कैसे

बाबू तुम कितने महान हो
तुम धरती पर भगवान हो

बाबू तुम त्याग की मूरत हो
तुम ही भगवान की सूरत हो

अल्फाज नहीं बोलूँ कैसे
कितना किया तोलूँ कैसे

तुमसे ही चंदा और आसमान है
तुमसे ये धरती जहान है 

तुम हो तो खिड़की,छत,दिवारें सब माकान है
वरना दुनिया विरान है

अल्फाज नहीं बोलूँ कैसे
कितना किया तोलूँ कैसे

पाल पोस कर बडा किया
परों में दी ताकत आैर खड़ा किया

और एक आस बाबू तुमसे
यूँही दिल से अपने लगाये रखना
सदा सिर पर 'रोहित' के हाथ अपना बनाये रखना

- रोहित सिंह

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!