आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Vriksh ka dard

मेरे अल्फाज़

वृक्ष का दर्द

Rohit Kumar

3 कविताएं

283 Views
गिर गया मैं धड़ाम से,
नीचता के व्यवहार से।
हथियार के एक वार से,
मानवता के शर्मसार से।।
अरे!मेरे ही बलबूते तो तुम खाते हो और फिर भी तुम मुझे काटते हो।
मेरी कटौती अगर नहीं रुकी तो,
जरूर वह दिन आएगा
बोतलों में ऑक्सीजन बिकेगी
लाज फिर तुमको खुद पर आएगी।
रोते बिलखते रह जाओगे,
जब तुमको समझ ना आएगा।
सोचोगे,गलत किया
फिर प्रलय का बवंडर आएगा।
खुद को माफ करते-करते,
तेरा अस्तित्व मिट जाएगा।
मुझे बेवजह जलाने वालों,
मरने के बाद मुझे कहां से लाओगे?
इसलिए कहता हूं,संभालो मुझको।
नहीं तो!खुद को कैसे संभालोगे?
ये मेरी चेतावनी है।
इसे ना तो मिन्नत समझना।।

फिर मानव हंसता है तो वृक्ष कहता है:-
अरे! गिर मैं दर्द से कराह रहा,
और बेशर्म मानो तो मुस्कुरा रहा
आखिर क्यों तू अपनी बर्बादी पर हंस रहा?
खुद से बिछाए जालों में,तू खुद ही फंस रहा।
ना जाने मैं बूढ़ा बरगद, कितने कबीलों और बस्तियों की पहचान थी?
चंद पैसों के लिए मानव तू क्यों
अपना पहचान खो रहा?
एक ही वार से ना जाने कितने
जान तू ले रहा?
जागो हे!धरती के बुद्धिजीवियों,
समझो इसे।
ना जाने तू क्यों हंस रहा?
खुद से बिछाए जाल में,
तु खुद ही फंस रहा।।

रोहित कुमार(पटना,बिहार)
छात्र,इलाहाबाद विश्वविद्यालय


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!