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मेरे अल्फाज़

मुझे...

Rishu Mishra

7 कविताएं

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मुझे गम नहीं अब हार का
न जीत का कोई जश्न है।
मैं शर वहीं अब पाथ का
जिसे न समर का ख़ौफ़ है।

मैं दर्द की गहराई को
यूँ धीरे से छूता नहीं।
हूँ सर्द की बरसात पर
गर्मी से मैं रूठा नहीं।

जज्बों के पथ पर चल रहा
मैं शांत भी निःस्वार्थ भी।
कुछ कर रहा कुछ हो रहा
अब पहले से प्रशांत भी।

संघर्ष के अभियान में
मैं पहले से प्रतिबद्ध हूँ।
सच्चाई की अभिव्यक्ति से
किंचित् नहीं मैं दूर हूँ।

प्रभुत्व के प्रकाश में
ब्लैकहोल बन गया हूँ मैं।
दायित्व के अधिकार में
क्यूँ पीछे हट गया हूँ मैं।

👉 रिशू मिश्र
प्रतापगढ़,उ.प्र.





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