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मेरे अल्फाज़

ख़ुदा का खेल

Rimpi Medhi

37 कविताएं

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ख़ुदा तू भी क्या-क्या खेल रचता है,
जिस दिन के लिए इंतज़ार करवाता था,
आज वो दिन ही न आये,
उसकी दुआ करवाता है।।।।

-रिम्पी मेधी
गुवाहाटी


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