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Haan main aurat hun

मेरे अल्फाज़

हाँ , मैं औरत हूँ

Reena Jangid

1 कविता

121 Views
हाँ मैं औरत हूँ


नहीं देनी मुझे कोई सफ़ाई 
अपने सही होने की
नहीं देनी मुझे कोई भी दलील 
साबित कुछ करने की
हूँ सम्पूर्ण खुद में मैं 

हाँ है ..
मुझे अभिमान है 
स्वयं के औरत होने पर 
और क्यों ना हो
पुत्री हूँ, पुत्रवधू हूँ, बहन हूँ 
सर्वत्र तत्व मैं माँ हूँ

आता है मुझे रिश्ते निभाना
वज़ूद मिटा कर अपनों को 
आबाद करना
सर ढकती हूँ पर 
इसलिए नहीं कि डरती हूँ
विदित है शान्ति मिलती है 
मेरे बुजुर्गों को

मैं जानती हूँ 
पतिधर्म को निभाना
इसलिए नहीं कि 
जमाने से डरती हूँ  
इसलिए कि प्रेम 
अथाह प्रेम करती हूँ

रात भर बच्चों के 
लिए जागती हूँ 
क्योंकि मेरा अंश हैै 
उसे चाहती हूँ
मै प्रतिमूर्ति प्रेम की 
सर्वत्र प्रेम बिखेरती 

भोजन पकाती हूँ मैं 
अंश माँ अन्नपूर्णा का हूँ 
मैं ही दुर्गा मैं ही लक्ष्मी
मैं ही घर में सरस्वती 
मैं ही चण्डी
मैं औरत हूँ 
स्वयं में परिपुर्ण हूँ
हाँ परिपूर्ण शाश्वत परिपूर्ण ।

 रीना

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