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BAISAKH MEN MAUSAM BEIMAAN

मेरे अल्फाज़

बैसाख में मौसम बेईमान

Ravindra Singh

23 कविताएं

28 Views
कहीं बादल रहे उमड़
कहीं आँधी रही घुमड़
अब आ गयी धूप
चुभती चिलचिलाती
अब सूखे कंठ से
चिड़िया गीत न गाती

कोयल को तो मिल गया
आमों से लकदक बाग़
कौआ ढूँढ़ रहा है मटका
गाता फिरे बेसुरा राग
चैतभर काटी फ़सल
बैसाख में खलिहान
आसमान को ताकता
बेबस निरीह किसान

बदला रुख़ आसमान का
आँधी-पानी का हो-हल्ला
उड़ जाता भूसे का ढेर
गीला होता सारा गल्ला
आँधियाँ ले लेती हैं
कितनों की जान
क़ुदरत कब होगी मेहरबाँ?
कठिन दौर में होता अक़्सर
क्यों मौसम भी बेईमान ?

- रवीन्द्र सिंह यादव

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